हिमाचल प्रदेश :-राजस्थान सरकार के पूर्व राज्य मंत्री, आध्यात्मिक चिंतक, विचारक, कथा प्रवक्ता एवं वंशावली संरक्षण एवं संवर्धन अकादमी (राजस्थान सरकार) के पूर्व अध्यक्ष राम सिंह राव (संत श्री राम) इन दिनों विश्व शांति, सौहार्द, प्रेम और भारतीय सांस्कृतिक चेतना का संदेश लेकर भारत परिक्रमा पर निकले हुए हैं।
उन्होंने बताया कि यह यात्रा किसी राजनीतिक अभियान या व्यक्तिगत प्रचार का माध्यम नहीं है, बल्कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा, संत संस्कृति, तीर्थों, आश्रमों और विभिन्न समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने का एक विनम्र प्रयास है। उनका उद्देश्य देश के कोने-कोने में जाकर लोगों से मिलना, उनकी जीवन शैली को समझना तथा प्रेम, करुणा, भाईचारे, राष्ट्रीय एकता और मानवीय मूल्यों का संदेश जन-जन तक पहुँचाना है।
भारत परिक्रमा के अंतर्गत उनकी यात्रा राजस्थान से प्रारंभ हुई। इसके बाद वे हरियाणा होते हुए जम्मू-कश्मीर पहुँचे, जहाँ उन्होंने विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का दर्शन किया। इसके उपरांत वे हिमाचल प्रदेश में प्रवेश कर डलहौजी, खज्जियार, जोत, कांगड़ा, धर्मशाला सहित अनेक स्थानों का भ्रमण कर चुके हैं। हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता, देव संस्कृति और लोगों के आत्मीय व्यवहार की उन्होंने मुक्त कंठ से सराहना की। वर्तमान में उनकी यात्रा शिमला की ओर अग्रसर है।
राम सिंह राव ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता है। देश के विभिन्न राज्यों में यात्रा करते हुए उन्हें यह अनुभव हुआ कि भाषा, वेशभूषा और परंपराएँ भिन्न होने के बावजूद भारतीय समाज प्रेम, श्रद्धा और अपनत्व के सूत्र में बंधा हुआ है। यही भारत की वास्तविक पहचान है।
उन्होंने कहा कि आज विश्व को हिंसा, तनाव और वैमनस्य नहीं, बल्कि संवाद, सहिष्णुता और आध्यात्मिक दृष्टि की आवश्यकता है। भारत की सनातन संस्कृति सदियों से "वसुधैव कुटुम्बकम्" और "सर्वे भवन्तु सुखिनः" का संदेश देती आई है। इसी संदेश को लेकर वे अपनी भारत परिक्रमा जारी रखे हुए हैं।
राम सिंह राव ने बताया कि यात्रा के दौरान वे संत-महात्माओं, समाजसेवियों, युवाओं, किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों से निरंतर संवाद कर रहे हैं। उनका विश्वास है कि जब समाज में प्रेम, विश्वास, नैतिकता और आध्यात्मिक जागरण का विस्तार होगा, तभी राष्ट्र और विश्व में स्थायी शांति स्थापित हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि उनकी यह भारत परिक्रमा आगे भी देश के विभिन्न राज्यों में जारी रहेगी और जहाँ-जहाँ अवसर मिलेगा, वहाँ भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।
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