दाड़लाघाट:-पंचायत दाड़लाघाट स्थित श्री बाडूबाड़ा देव प्रांगण में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के छठे दिवस कथावाचक आचार्य हरि जी महाराज ने भगवान शिव के अनन्य भक्त मार्कंडेय ऋषि के प्रेरणादायक प्रसंग का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, विश्वास और प्रभु शरणागति का संदेश दिया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। अपने प्रवचन में आचार्य हरि जी महाराज ने बताया कि प्राचीन काल में मृकंडु ऋषि ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। भगवान शिव के वरदान से उन्हें मार्कंडेय नामक पुत्र की प्राप्ति हुई, लेकिन उसकी आयु केवल 16 वर्ष निर्धारित थी। जब मार्कंडेय को अपनी अल्पायु का ज्ञान हुआ तो उन्होंने भगवान शिव की आराधना प्रारंभ कर दी और पूर्ण श्रद्धा एवं समर्पण के साथ शिवलिंग की पूजा में लीन हो गए। उन्होंने बताया कि जब मार्कंडेय की आयु पूर्ण होने का समय आया तो यमराज स्वयं उनके प्राण लेने पहुंचे। उस समय भी मार्कंडेय भगवान शिव के ध्यान में मग्न होकर शिवलिंग से लिपट गए। यमराज द्वारा फेंका गया पाश शिवलिंग पर पड़ गया, जिससे भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने अपने भक्त की रक्षा करते हुए यमराज को पराजित कर दिया। भगवान शिव ने मार्कंडेय को चिरंजीवी होने का आशीर्वाद प्रदान किया।
आचार्य हरि जी महाराज ने कहा कि यह प्रसंग दर्शाता है कि सच्ची श्रद्धा, अटूट विश्वास और प्रभु भक्ति से असंभव प्रतीत होने वाली परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है। भगवान शिव अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं और उनकी शरण में आने वाले व्यक्ति का कभी अहित नहीं होता। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में सत्य, धर्म और सदाचार का पालन करने का आह्वान करते हुए कहा कि मनुष्य को हर परिस्थिति में ईश्वर पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिव भक्ति मनुष्य को भय, चिंता और नकारात्मकता से मुक्त कर आत्मिक शक्ति प्रदान करती है। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर रहे तथा भगवान शिव के भजनों और जयघोषों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
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