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वाश इंस्टिट्यूट द्वारा आयोजित सुरक्षित पेयजल, जल गुणवत्ता परीक्षण एवं घरेलू जल उपचार पर दो दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न56 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मिला प्रशिक्षण, प्रमाण-पत्र एवं फील्ड मार्गदर्शिका वितरित

दाड़लाघाट:- वाश इंस्टीट्यूट द्वारा सुरक्षित पेयजल, जल गुणवत्ता परीक्षण एवं घरेलू जल उपचार विषय पर 18-19 जून को बाघल होटल, दाड़लाघाट (विकास खंड कुनिहार, जिला सोलन) में आयोजित दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला में कुनिहार ब्लॉक की 10 ग्राम पंचायतों के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 56 महिलाओं ने भाग लेकर सुरक्षित पेयजल प्रबंधन एवं जल गुणवत्ता परीक्षण का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को घरेलू स्तर पर पेयजल उपचार (Household Water Treatment), सुरक्षित जल भंडारण (Safe Storage), जल गुणवत्ता परीक्षण, पेयजल स्रोतों की सुरक्षा तथा स्वच्छता के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान वाश इंस्टीट्यूट की प्रोग्राम मैनेजर डॉ. आकांक्षा वर्मा ने प्रतिभागियों को सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए मल्टी बैरियर अप्रोच (Multi-Barrier Approach) की अवधारणा पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि जल स्रोत से लेकर उपभोक्ता तक प्रत्येक स्तर पर आवश्यक सावधानियां अपनाकर ही सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित किया जा सकता है।

प्रोग्राम सहयोगी अजय शर्मा ने प्रतिभागियों को घरेलू स्तर पर पानी को सुरक्षित बनाने के विभिन्न तरीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने उबालकर पानी को शुद्ध करना, क्लोरीनीकरण, फिल्ट्रेशन तथा अन्य घरेलू जल उपचार विधियों का प्रदर्शन करते हुए इनके सही उपयोग की जानकारी दी।

इसके उपरांत वाटर एक्सपर्ट मोनिका ठाकुर ने फील्ड टेस्टिंग किट (Field Testing Kit) के माध्यम से जल गुणवत्ता परीक्षण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को पेयजल के विभिन्न गुणवत्ता मानकों की जांच करने की विधि सिखाई, जिससे वे अपने-अपने गांवों में नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता का परीक्षण कर समुदाय को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

कार्यशाला के दौरान जल प्रदूषण की बढ़ती चुनौती पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षकों एवं प्रतिभागियों ने स्वच्छ जल और स्वच्छता सुनिश्चित करने में सामुदायिक भागीदारी को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि प्रशिक्षित महिलाएं अपने-अपने गांवों में जन-जागरूकता फैलाकर व्यवहार परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। साथ ही फील्ड स्तर पर जागरूकता गतिविधियों के संचालन हेतु प्रत्येक प्रतिभागी को एक मार्गदर्शन फ्लिपबुक एवं प्रशिक्षण मार्गदर्शिका भी प्रदान की गई।

इस अवसर पर वाश इंस्टीट्यूट के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. ओ. पी. भुरेटा ने प्रतिभागियों को आगामी छह माह की कार्ययोजना से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि सभी प्रशिक्षित महिलाएं अगले छह महीनों तक अपने-अपने गांवों में 'वाटर एक्सपर्ट' के रूप में कार्य करेंगी। वे सुरक्षित पेयजल, जल गुणवत्ता परीक्षण एवं घरेलू जल उपचार के प्रति समुदाय को जागरूक करेंगी तथा जल गुणवत्ता परीक्षण एवं जल सुरक्षा संबंधी गतिविधियों में जल शक्ति विभाग, ग्रामीण विकास विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सहयोग देंगी।

कार्यशाला में वाश इंस्टीट्यूट की ओर से प्रोग्राम मैनेजर डॉ. आकांक्षा वर्मा, स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. ओ. पी. भुरेटा, प्रोग्राम सहयोगी अजय शर्मा, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर यशपाल शर्मा एवं अमित शर्मा तथा वाटर एक्सपर्ट मोनिका ठाकुर ने प्रशिक्षण प्रदान किया।

उल्लेखनीय है कि यह दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला वाश इंस्टीट्यूट एवं CAWST के संयुक्त सहयोग से प्रदेश जल शक्ति विभाग तथा ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से आयोजित की गई।

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