दाड़लाघाट
दाड़लाघाट क्षेत्र के संघोई धार में 125 दिनों से जारी ग्रामीणों का शांतिपूर्ण धरना और क्रमिक भूख हड़ताल फिलहाल अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया। 28 नवंबर से शुरू हुआ यह आंदोलन 1 अप्रैल को एक अहम मोड़ पर पहुंचा, जब प्रदर्शनकारियों को पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा और पूर्व जिला परिषद सदस्य आशा परिहार ने जूस पिलाकर आंदोलन को अगली रणनीति तक रोकने की घोषणा की। ग्रामीणों का कहना है कि हाल ही में आई डीजीएमस की जांच रिपोर्ट ने उनके आरोपों को सही साबित किया है। रिपोर्ट में संघोई धार, मांगू और कशलोग क्षेत्रों में रात्रिकालीन खनन और भारी ब्लास्टिंग की पुष्टि होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा ने कहा कि यह रिपोर्ट कंपनी की कथित गैरकानूनी गतिविधियों और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियां दोहराई गईं, तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन से रात्रिकालीन खनन पर रोक और संवेदनशील क्षेत्रों में ब्लास्टिंग बंद कराने की मांग की। आशा परिहार ने 125 दिनों तक संघर्ष करने वाले ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों के साहस की सराहना करते हुए इसे उनकी जीत बताया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद रखी। प्रभावित महिलाओं विमला देवी और महंतु देवी ने आरोप लगाया कि कंपनी द्वारा वर्षों से उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया गया और कई स्थानों पर बिना सहमति खनन किया गया। उन्होंने दोबारा ऐसी स्थिति बनने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी। समिति अध्यक्ष धीरज ठाकुर ने बताया कि डीजीएमएस रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी गई है और कार्रवाई का आश्वासन मिला है। उन्होंने कहा कि यदि अवैध खनन या ब्लास्टिंग दोबारा हुई तो ग्रामीण सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। समिति सचिव देवेंद्र सिंह ने कंपनी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। क्षेत्र में प्रदूषण, पानी की कमी, घरों में दरारें और स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर बनी हुई हैं। कानूनी सलाहकार रजनीश शर्मा ने झूठे मुकदमों की वापसी और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की। संयोजक संदीप ठाकुर ने प्रभावित युवाओं को 70 प्रतिशत रोजगार, पुनर्वास, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था, प्रदूषण की जांच और रात्रिकालीन खनन पर स्थायी प्रतिबंध सहित कई मांगें दोहराईं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि फिलहाल स्थगित किया गया है। यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक और उग्र रूप में फिर शुरू किया जाएगा।
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