औद्योगिक शहर परवाणू में 'परवाणू इंडेन' गैस एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उपभोक्ताओं ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गैस बुकिंग और डिलीवरी को लेकर तकनीकी खामियों और संचार की कमी ने ग्राहकों को असमंजस में डाल दिया है। मामला तब सुर्खियों में आया जब सुरेंद्र शर्मा नामक एक उपभोक्ता को सिस्टम से विरोधाभासी संदेश प्राप्त हुए।
क्या है पूरा मामला?
उपभोक्ता सुरेंद्र शर्मा ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आपबीती साझा की है। उन्होंने बताया कि उन्हें एक ही समय में दो परस्पर विरोधी संदेश मिले:
* पहला संदेश: इसमें इनवॉइस जनरेट होने और डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) साझा करने की जानकारी दी गई।
* दूसरा संदेश: ठीक उसी समय यह संदेश आ गया कि सिलेंडर डिलीवर हो चुका है और अगली बुकिंग की संभावित तारीख 28 अप्रैल 2026 है।
बिना सिलेंडर प्राप्त हुए 'डिलीवरी सक्सेसफुल' का मैसेज आने से उपभोक्ता न केवल हैरान हैं, बल्कि उनमें यह डर भी बैठ गया है कि कहीं उनके कोटे का सिलेंडर किसी और को तो नहीं भेजा जा रहा है।
DAC (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) की सुरक्षा पर संकट
नियमों के अनुसार, DAC (जैसे: 606322) की भूमिका सुरक्षा कवच की तरह होती है। इसे उपभोक्ता को तभी साझा करना चाहिए जब सिलेंडर उनके घर पहुँच जाए और डिलीवरी बॉय इसे मांगे। लेकिन सिस्टम की इन खामियों ने इस सुरक्षा प्रोटोकॉल को ही अर्थहीन बना दिया है। यदि सिस्टम समय से पहले ही 'डिलीवरी' दर्ज कर रहा है, तो पारदर्शी वितरण प्रणाली पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है।
उपभोक्ताओं में रोष
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि अक्सर बुकिंग के दौरान ऐसी तकनीकी गड़बड़ियां देखने को मिलती हैं। ग्राहकों के अनुसार:
* जल्दबाजी का खेल: एजेंसी का सॉफ्टवेयर या वितरण प्रणाली में बरती जा रही जल्दबाजी उपभोक्ताओं को मानसिक परेशानी में डाल रही है।
* जवाबदेही की कमी: समय रहते सुधार न होने से धोखाधड़ी की आशंका बढ़ जाती है।
* सुधार की मांग: उपभोक्ताओं ने मांग की है कि गैस एजेंसी अपनी सूचना प्रणाली को दुरुस्त करे ताकि पारदर्शिता बनी रहे और ग्राहकों को बेवजह की उलझनों का सामना न करना पड़े।
फिलहाल, इस मामले के बाद परवाणू के अन्य उपभोक्ताओं ने भी अपनी चिंताएं जाहिर की हैं, जिससे एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों ने जोर पकड़ लिया है।
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